Saturday, May 30, 2009

बुलबुला

बरसात हो रही है.........जमीन पर पड़ती बूँदें.........बनते बिगड़ते बुलबुले.........इन्ही बुलबुलों सी ही तो है जिन्दगी.......एक पल बनती अगले ही पल बिगड़ती पर इन दो पलों के बीच एक पूरी जिंदगी। कश्मकश.......होड़......आपाधापी......संघर्ष.......औपचारिकता, यही जिंदगी के पर्याय बन गए हैं। लड़का हो या लड़की.........पैदा होते ही जीने की जद्दोदहद.........चीख चीख कर सांस खींच कर जिंदगी की शुरुआत........माँ की उंगली का सहारा ले कर पहली बार खड़ा होना, वो पहला कदम........माँ बाप के साथ जिंदगी की इसी भगदड़ में शामिल हो जाता है। आज स्कूल में दाखिला........फ़िर खेल कूद में ईनाम.........गायन भी तो सीखना है........अरे ! क्रिकेट क्लास तो रह ही गई........थोड़ा सा ठहराव..........फ़िर नया संघर्ष...........नौकरी ढूँढने का, लग जाय तो उन्नति..........विदेश कैसे जाऊं..........हाय कहीं कोई मुझसे आगे निकल जाय..........उसको पछाड़ दिया..........इसको पीछे छोड़ दिया..........बड़ी उपलब्धि........तब एक और नई जिंदगी साथ जुड़ जाती है इसी आपाधापी में वही भगदड़ वही मारामारी.......बच्चे हुए तो किस्सा शुरू से शुरू.........सारे रिश्ते नाते औपचारिकता भर रह गए। यहाँ तक की खुशियों के साथ भी औपचारिकता ही निभाते रहे। मनाया तो हर एक छोटी से छोटी खुशी का भी बड़ा सा जश्न, पर उसके पीछे भी कुछ जोड़तोड़........कहीं दिखावा........कभी होड़........कभी किसी की खुशामद.......कभी किसी पर एहसान। जिंदगी काट ली, जी नही.......पर हाय यह क्या !!!!!!!! सब थम गया........बुलबुला तो फूट गया........ढेरों नए बनते बिगड़ते हैं पर वो वाला कहाँ है ?????????? वो तो विलीन हो गया उसी अनंत में जहाँ से आया था।
फ़िर क्या मायने रखती है यह अंधी दौड़.........जहाँ आदमी आदमी के सर पर पाँव रख कर ऊपर बढ़ने में लगा है.........इन बनते बिगड़ते बुलबुलों को देख कर यही सोच रही हूँ। क्योंकि इन्ही में से एक बुलबुला मैं भी तो हूँ।

22 comments:

vandan gupta said...

ji han zindagi bulbule si hi hai......na jaane kab foot jaye........badhiya likha hai.

Unknown said...

aapne jindgi ki sachachai ko bahut hi najdeek se bataya hai. mai chahuga ki jindgi ki kuch achchhe anubhav ko bhi vayakt kre.

Mohinder56 said...

पानी केरा बुलबुला असमनुष्य की जात
देखते ही छिप जायेगा ज्यूं तारा प्रभात

फ़िर भी जब तक जिन्दगी है हम इसके अस्तित्व से इन्कार नहीं कर सकते और इसके अस्तित्व को हमेशा हमेशा जिन्दा रखने के लिये कुछ अच्छा और अलग करने की आवश्यकता सदा रहेगी.

रंजना said...

Bahut bahut sahi kaha...

36solutions said...

क्योंकि इन्ही में से एक बुलबुला मैं भी तो हूँ .... सार्थक चिंतन की ओर ले जाने वाले इन शटदों के लिये आभार ..

अनिल कान्त said...

zindgi ko bayaan kar diya aapne

Vinay said...

hubaab see zindagii hai

Unknown said...

इन बुलबुलों के जरिये इनकी जिंदगी की सच्चाई अभिव्यक्त की है . बहुत सुन्दर . आपकी पोस्ट की चर्चा समयचक्र में

Udan Tashtari said...

सच्ची रचना!

रंजू भाटिया said...

सही कहा आपने ज़िन्दगी एक बुलबुला ही है .सुन्दर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

जिन्दगी एक बुलबुला ही तो है।
इस बरसात में हम भी भीग गए।

dr. ashok priyaranjan said...

बहुत अच्छा लिखा है आपने । आपका शब्द संसार भाव, विचार और अभिव्यिक्ति के स्तर पर काफी प्रभावित करता है ।

मैने अपने ब्लाग पर एक लेख लिखा है-फेल होने पर खत्म नहीं हो जाती जिंदगी-समय हो तो पढ़ें और कमेंट भी दें-

http://www.ashokvichar.blogspot.com

पूनम श्रीवास्तव said...

bulbulon ko lekar aapne is shabd chitr men pura jeevan darshan hee prastut kar diya hai .bahut achchha laga apke shabdon ko padhkar.
Poonam

प्रवीण त्रिवेदी said...

.... सार्थक चिंतन

संजीव गौतम said...

shaandaar shikhaa jee lekin kyaa baat hai bahut din se koee naee post hee naheen. sab theek to hai?

राजीव थेपड़ा ( भूतनाथ ) said...

कभी-कभी तो यूँ सोचने में बेशक कैसा-सा तो लगता है....मगर यह भी तो सच है कि उसके बाद हम वहीँ...उन्हीं चीज़ों में उलझे रह जाते हैं....गोया कि यही हमारा चुनाव है....!!

अशरफुल निशा said...

Sahi kaha,zindagi ek bulbula.
Think Scientific Act Scientific

shivraj gujar said...

वाकई बुलबुला है जीवन. बहुत ही रोचक रचना.
मेरे ब्लॉग (meridayari.blogspot.com) पर भी आयें.

नीलिमा सुखीजा अरोड़ा said...

बहुत सही, जिन्दगी एक बुलबुला ही तो है

D Silent Assasin said...

nice post !!!

really liked that !!!

plz visit my blog too ...hope ull like it !!

www.classicshayari.blogspot.com
www.rashtrakavi.blogspot.com

अखिलेश शुक्ल said...

bahot hi acchi rachana hai. Badhai
akhilesh shukla
http://katha-chakra.blogspot.com

Shuaib said...

bilkul sahi kaha aapne.