बातों से तो जताता है वो मेरा अपना है
बातों के असर से लगता है गैरों में गिनता है
तन्हा मिले तो हर एक अदा कातिलाना
महफ़िल में आये तो अजब रंग में दिखता है
कोई बेसबब बेसाख्ता दूरियां नहीं बनाता
यूँ ही नहीं कोई दिले गुलशन उजड़ता है
कभी किसी का दीद आँखों में नूर भरता है
कभी कोई ख्याले वस्ल भी दिल में गड़ता है
जाओ किया माफ़ मैंने तुमको अपना क़त्ल
मगर ये रखना याद वहां जवाब देना पड़ता है
दिलों के आइनों पे शुबह के पत्थर जो फेंको
हर एक अक्स उसके बाद टुकड़ों में उभरता है
दर्द दिल का जब अपनी हदों के पार आजाये
आँखों में तभी तूफानों सैलाब उमड़ता है
नहीं अच्छा गुरूर हरदम कभी झुकना भी जरूरी है
दरिया भी मुड़ जाता है जब कोई चट्टान अड़ता है
रखती हूँ उसको अपनी दुआओं में लपेट कर
वो शख्स जो मेरे दिल की तहों में उतरता है
बड़े अजीब हैं जो कहते हैं उस तक रसाई मुहाल है
ख़ुदा के घर का हर रस्ता खुद अपने दिल से गुज़रता है।
Wednesday, March 30, 2011
Saturday, March 19, 2011
दुआएं..........
हो जाएँगी जिन्दा सभी वीरान महफ़िलें
जो तेरे नाम के साथ एक मेरा भी जिक्र चले
ये दोस्त एहबाब सभी जिन्दगी की हद में हैं
उसको बना लो अपना जो उस पार भी चले
बनता नहीं यादगार कोई किस्सा कोई अफसाना
जब तलक शम्मा के संग परवाना भी न जले
क्यूँ आवारा बना फिरता है वो मेरा मसीहा
अल्लाह ज़रा मुझपे अब ये राज़ भी खुले
उस जैसे दोस्तों की बड़ी ज़रुरत है यहाँ
खुदा से मेरी दुआ है उसे मेरी भी उम्र लगे
वो नज़रों से तोड़ देता है दुनिया का हर तिलिस्म
शर्त ये है कि उस निगाहबां से निगाह जा मिले
इतना न दर्द दे कि वो मिट जाए ज़रा हौसला भी बख्श
जिस राह वो चल पड़ा है उसी राह पर चले
जुर्रतें करता रहे तू यूँ ही रहे हस्ती तेरी बुलंद
कर दे जो तू अपनी आवाज़ उस शाह के हवाले।
जो तेरे नाम के साथ एक मेरा भी जिक्र चले
ये दोस्त एहबाब सभी जिन्दगी की हद में हैं
उसको बना लो अपना जो उस पार भी चले
बनता नहीं यादगार कोई किस्सा कोई अफसाना
जब तलक शम्मा के संग परवाना भी न जले
क्यूँ आवारा बना फिरता है वो मेरा मसीहा
अल्लाह ज़रा मुझपे अब ये राज़ भी खुले
उस जैसे दोस्तों की बड़ी ज़रुरत है यहाँ
खुदा से मेरी दुआ है उसे मेरी भी उम्र लगे
वो नज़रों से तोड़ देता है दुनिया का हर तिलिस्म
शर्त ये है कि उस निगाहबां से निगाह जा मिले
इतना न दर्द दे कि वो मिट जाए ज़रा हौसला भी बख्श
जिस राह वो चल पड़ा है उसी राह पर चले
जुर्रतें करता रहे तू यूँ ही रहे हस्ती तेरी बुलंद
कर दे जो तू अपनी आवाज़ उस शाह के हवाले।
Wednesday, March 9, 2011
तेरे इश्क में........
अजब मोड़ पर लायी है जिन्दगी
जहाँ मुझको मेरा ही पता नहीं
हर शै में है उसकी ही रौशनी
कोई जगह न बची जहाँ वो नहीं
ये गुनाह नहीं कोई सबाब है
जो इस सिम्त आ गयी आज मैं
मुझे यकीन है ये तेरा करम ही है
मुझसे हुई कोई खता नहीं
तेरे दर ही के आगे ख़ाक हों
इससे ज्यादा क्या चाहिए
वो बशर ही क्या जिसकी जिंदगी
तेरे इश्क में होती फ़ना नहीं।
जहाँ मुझको मेरा ही पता नहीं
हर शै में है उसकी ही रौशनी
कोई जगह न बची जहाँ वो नहीं
ये गुनाह नहीं कोई सबाब है
जो इस सिम्त आ गयी आज मैं
मुझे यकीन है ये तेरा करम ही है
मुझसे हुई कोई खता नहीं
तेरे दर ही के आगे ख़ाक हों
इससे ज्यादा क्या चाहिए
वो बशर ही क्या जिसकी जिंदगी
तेरे इश्क में होती फ़ना नहीं।
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Tuesday, February 22, 2011
दाम......
सीने में उठी है एक लहर
शायद मुहब्बत नाम है
दो दिलों को जोड़ना
महकाना ही इसका काम है
आती जाती हर सांस पर
तेरी आरज़ू के राग हैं
हर एक धड़कन मेरे दिल की
अब तो तुम्हारे नाम है
तेरी फुर्कत से रंगी
मेरी तन्हा हर शाम है
हर दिन बदबख्त सा हुआ
और ग़मज़दा हर रात है
मेरी तड़प तो देख तू
कि जिंदगी की कैद से
तेरा वस्ल ही अब मुझे
निज़ात दिलाने का दाम है।
शायद मुहब्बत नाम है
दो दिलों को जोड़ना
महकाना ही इसका काम है
आती जाती हर सांस पर
तेरी आरज़ू के राग हैं
हर एक धड़कन मेरे दिल की
अब तो तुम्हारे नाम है
तेरी फुर्कत से रंगी
मेरी तन्हा हर शाम है
हर दिन बदबख्त सा हुआ
और ग़मज़दा हर रात है
मेरी तड़प तो देख तू
कि जिंदगी की कैद से
तेरा वस्ल ही अब मुझे
निज़ात दिलाने का दाम है।
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Monday, January 31, 2011
वादा करो........
फोन पर तुम्हारे वो शब्द...........मैं अब थक गया हूँ...........हार गया हूँ..........दिल चाहता है इस जिंदगी को ही ख़त्म कर दूं...........ये क्या कह गए तुम..........तुम और ऐसी निराशा की बातें..........तुम्हारे मुंह से ऐसी बातें मुझे बर्दाश्त नहीं होती.........परिस्थितियाँ चाहे जैसी हों...........हालात चाहे जैसे रहे हों........पर मैंने तुमको हमेशा जीवन उर्जा से भरा ही देखा है........फिर तुम्हारा यह रूप मैं कैसे बर्दाश्त करूँ..........तुम जिसने मुझे जीने की राह दिखाई आज खुद जीवन से पलायन की बात कर रहे हो...........तुमको ऐसा सोचना भी शोभा नहीं देता.........मुझे पता है तुम जीवन के किन पथरीले रास्तों से गुजर कर आये हो...........तुमने जीवन में बड़े उतार चढ़ाव देखे हैं...........ये तुम्हारे जीवन के अनुभव ही तो हैं जो जिन्होंने तुमको इतना संवेदनशील बना दिया है...........एक बार बस एक बार पीछे मुड़ कर देखो..........एक बार पीछे पलट कर देखो.........ज़रा अपनी ज़िंदगी की किताब को पलटकर तो देखो.........हो सकता है कि तुमको इसमें ऐसा बहुत कुछ दिखे जो तुमने खो दिया है..........या वो जो तुम्हे नहीं मिल सका है.........पर जितना मैं तुमको जानती हूँ..........ये कथित सफलताएं तुम्हारा मकसद कभी नहीं रही..........तुमको कभी इस अंधी दौड़ में शामिल नहीं देखा मैंने...........फिर आज ऐसा क्यूँ.........ज़रा एक बार अपनी ओर ध्यान से देखो........क्या तुम्हे नहीं लगता तुमने वो पाया है............जिसे पाने की ज़रुरत भी लोगों को तब समझ में आती है.............जब उनके पास कुछ पाने के लिए वक़्त ही नहीं बचा होता.........एक बार खुद पर अपने दिल पर नज़र तो डालो..........और खुद अपनी तुलना करो अपने आप से...........जो तुम पहले थे और जो तुम आज हो...........एक इंसान के तौर पर तुम आज कहाँ हो.........बोलो तुम कैसे कह सकते हो कि तुम हार गए हो..........तुम जो खुद को जीत चुके हो वो हार गया !!!! कैसे ?? इस निराशा से बाहर आओ........उनको मत देखो जो तुम्हारी ओर नहीं देखते............. उनको देखो जो तुम्हारी ओर ही देख रहे हैं...........उनके बारे में सोचो जो तुम्हारे भरोसे चल रहे हैं...........मेरे बारे में सोचो.........तुम्हे इस हाल में देख कर मैं कैसे जिऊँ.........तुम टूट गए तो मैं तो बिखर ही जाऊँगी..........नहीं तुम ऐसा नहीं कर सकते..........तुम नहीं हार सकते........तुम नहीं टूट सकते..........तुमको इन अंधेरों से बाहर आना ही होगा...........मुझसे वादा करो तुम इस हताशा से लड़ कर बाहर आओगे.........मुझसे वादा करो तुम फिर कभी यूँ हार नहीं मानोगे..........मुझसे वादा करो कि अगली बार जब मिलोगे तो होठों पर वही मुस्कान होगी और दिल में वही जोश..........देखो तो तुम जो मुझे जिंदगी के नित नए फलसफे समझाते रहते हो.........आज मुझे तुमको कुछ समझाना पड़ रहा है.......... न न फिर से ऐसा न करना............फिर कभी ऐसा न कहना........तुम हमेशा खुश रहो........हमेशा मुस्कराते रहो..........हमेशा मेरे साथ रहो........मेरे रहो.......रहोगे न.......वादा करो.........
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