Saturday, March 19, 2011

दुआएं..........

हो जाएँगी जिन्दा सभी वीरान महफ़िलें
जो तेरे नाम के साथ एक मेरा भी जिक्र चले

ये
दोस्त एहबाब सभी जिन्दगी की हद में हैं
उसको बना लो अपना जो उस पार भी चले

बनता नहीं यादगार कोई किस्सा कोई अफसाना
जब तलक शम्मा के संग परवाना भी जले

क्यूँ आवारा बना फिरता है वो मेरा मसीहा
अल्लाह ज़रा मुझपे अब ये राज़ भी खुले

उस जैसे दोस्तों की बड़ी ज़रुरत है यहाँ
खुदा से मेरी दुआ है उसे मेरी भी उम्र लगे

वो नज़रों से तोड़ देता है दुनिया का हर तिलिस्म
शर्त ये है कि उस निगाहबां से निगाह जा मिले

इतना दर्द दे कि वो मिट जाए ज़रा हौसला भी बख्श
जिस राह वो चल पड़ा है उसी राह पर चले

जुर्रतें करता रहे तू यूँ ही रहे हस्ती तेरी बुलंद
कर दे जो तू अपनी आवाज़ उस शाह के हवाले



24 comments:

रश्मि प्रभा... said...

क्यूँ आवारा बना फिरता है वो मेरा मसीहा
अल्लाह ज़रा मुझपे अब ये राज़ भी खुले
khul jaye raaz to koi baat bane

इमरान अंसारी said...

शिखा जी,

खूबसूरत ग़ज़ल.....हर शेर बढ़िया.....उर्दू की मिठास मिली इस ग़ज़ल में......प्रशंसनीय|

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

उस जैसे दोस्तों की बड़ी ज़रुरत है यहाँ
खुदा से मेरी दुआ है उसे मेरी भी उम्र लगे

बहुत खूबसूरत गज़ल ...

Shah Nawaz said...

बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल...

आपको परिवार सहित होली की बहुत-बहुत मुबारकबाद... हार्दिक शुभकामनाएँ!

Udan Tashtari said...

बेहतरीन गज़ल..

आपको एवं आपके परिवार को होली की बहुत मुबारकबाद एवं शुभकामनाएँ.

सादर

समीर लाल

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत उम्दा गजल!
आपको होली की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

Himanshu Vikram said...

Shikha Ji,

Day by day your pen is getting more and more shining.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 22 -03 - 2011
को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

http://charchamanch.uchcharan.com/

अजय कुमार said...

उम्दा गजल ,बधाई

वाणी गीत said...

बनता नहीं यादगार कोई किस्सा कोई अफसाना
जब तलक शम्मा के संग परवाना भी न जले...
सभी शेर लाजवाब है !

mridula pradhan said...

bahut achchi gazal.

वन्दना said...

्सुन्दर शेरो से सजी शानदार गज़ल के लिये बधाई।

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

हर शेर उम्दा...

Akhil said...

umda khayal...sundar rachna..

M VERMA said...

खूबसूरत खयाल की गज़ल

baabusha said...

बनता नहीं यादगार कोई किस्सा कोई अफसाना
जब तलक शम्मा के संग परवाना भी न जले

kya baat hai ! Bahot khoob !

अनामिका की सदायें ...... said...

aameeen.....khuda kare aapki sari duaai kabool ho. sunder gazal.

मोहिन्दर कुमार said...

खूबसूरत अहसास संजोये सुन्दर रचना

Sadhana Vaid said...

हर शेर खूबसूरत और भावपूर्ण है ! आपकी गज़ल दिल पर असर करने में कारगर है ! बधाई स्वीकार करें !

महफूज़ अली said...

बहुत ही शानदार....

GirishMukul said...

वाह

amrendra "amar" said...

इतना न दर्द दे कि वो मिट जाए ज़रा हौसला भी बख्श
जिस राह वो चल पड़ा है उसी राह पर चले

खूबसूरत ग़ज़ल.****

ZEAL said...

इस रचना में एक ऐसे दोस्त कि कल्पना है , जो मिल जाए गर तो धरती भी जन्नत लगने लगे ।

Kishore Choudhary said...

एक से बढ़कर एक...
बहुत बढ़िया कहने से भी वो बात नहीं बन पा रही जो कहना चाहता हूँ.
आप तक बहुत देर से पहुंचा हूँ. उम्दा बहुत उम्दा !!