हो जाएँगी जिन्दा सभी वीरान महफ़िलें
जो तेरे नाम के साथ एक मेरा भी जिक्र चले
ये दोस्त एहबाब सभी जिन्दगी की हद में हैं
उसको बना लो अपना जो उस पार भी चले
बनता नहीं यादगार कोई किस्सा कोई अफसाना
जब तलक शम्मा के संग परवाना भी न जले
क्यूँ आवारा बना फिरता है वो मेरा मसीहा
अल्लाह ज़रा मुझपे अब ये राज़ भी खुले
उस जैसे दोस्तों की बड़ी ज़रुरत है यहाँ
खुदा से मेरी दुआ है उसे मेरी भी उम्र लगे
वो नज़रों से तोड़ देता है दुनिया का हर तिलिस्म
शर्त ये है कि उस निगाहबां से निगाह जा मिले
इतना न दर्द दे कि वो मिट जाए ज़रा हौसला भी बख्श
जिस राह वो चल पड़ा है उसी राह पर चले
जुर्रतें करता रहे तू यूँ ही रहे हस्ती तेरी बुलंद
कर दे जो तू अपनी आवाज़ उस शाह के हवाले।
Saturday, March 19, 2011
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24 comments:
क्यूँ आवारा बना फिरता है वो मेरा मसीहा
अल्लाह ज़रा मुझपे अब ये राज़ भी खुले
khul jaye raaz to koi baat bane
शिखा जी,
खूबसूरत ग़ज़ल.....हर शेर बढ़िया.....उर्दू की मिठास मिली इस ग़ज़ल में......प्रशंसनीय|
उस जैसे दोस्तों की बड़ी ज़रुरत है यहाँ
खुदा से मेरी दुआ है उसे मेरी भी उम्र लगे
बहुत खूबसूरत गज़ल ...
बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल...
आपको परिवार सहित होली की बहुत-बहुत मुबारकबाद... हार्दिक शुभकामनाएँ!
बेहतरीन गज़ल..
आपको एवं आपके परिवार को होली की बहुत मुबारकबाद एवं शुभकामनाएँ.
सादर
समीर लाल
बहुत उम्दा गजल!
आपको होली की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!
Shikha Ji,
Day by day your pen is getting more and more shining.
चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 22 -03 - 2011
को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..
http://charchamanch.uchcharan.com/
उम्दा गजल ,बधाई
बनता नहीं यादगार कोई किस्सा कोई अफसाना
जब तलक शम्मा के संग परवाना भी न जले...
सभी शेर लाजवाब है !
bahut achchi gazal.
्सुन्दर शेरो से सजी शानदार गज़ल के लिये बधाई।
हर शेर उम्दा...
umda khayal...sundar rachna..
खूबसूरत खयाल की गज़ल
बनता नहीं यादगार कोई किस्सा कोई अफसाना
जब तलक शम्मा के संग परवाना भी न जले
kya baat hai ! Bahot khoob !
aameeen.....khuda kare aapki sari duaai kabool ho. sunder gazal.
खूबसूरत अहसास संजोये सुन्दर रचना
हर शेर खूबसूरत और भावपूर्ण है ! आपकी गज़ल दिल पर असर करने में कारगर है ! बधाई स्वीकार करें !
बहुत ही शानदार....
वाह
इतना न दर्द दे कि वो मिट जाए ज़रा हौसला भी बख्श
जिस राह वो चल पड़ा है उसी राह पर चले
खूबसूरत ग़ज़ल.****
इस रचना में एक ऐसे दोस्त कि कल्पना है , जो मिल जाए गर तो धरती भी जन्नत लगने लगे ।
एक से बढ़कर एक...
बहुत बढ़िया कहने से भी वो बात नहीं बन पा रही जो कहना चाहता हूँ.
आप तक बहुत देर से पहुंचा हूँ. उम्दा बहुत उम्दा !!
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