बातों से तो जताता है वो मेरा अपना है
बातों के असर से लगता है गैरों में गिनता है
तन्हा मिले तो हर एक अदा कातिलाना
महफ़िल में आये तो अजब रंग में दिखता है
कोई बेसबब बेसाख्ता दूरियां नहीं बनाता
यूँ ही नहीं कोई दिले गुलशन उजड़ता है
कभी किसी का दीद आँखों में नूर भरता है
कभी कोई ख्याले वस्ल भी दिल में गड़ता है
जाओ किया माफ़ मैंने तुमको अपना क़त्ल
मगर ये रखना याद वहां जवाब देना पड़ता है
दिलों के आइनों पे शुबह के पत्थर जो फेंको
हर एक अक्स उसके बाद टुकड़ों में उभरता है
दर्द दिल का जब अपनी हदों के पार आजाये
आँखों में तभी तूफानों सैलाब उमड़ता है
नहीं अच्छा गुरूर हरदम कभी झुकना भी जरूरी है
दरिया भी मुड़ जाता है जब कोई चट्टान अड़ता है
रखती हूँ उसको अपनी दुआओं में लपेट कर
वो शख्स जो मेरे दिल की तहों में उतरता है
बड़े अजीब हैं जो कहते हैं उस तक रसाई मुहाल है
ख़ुदा के घर का हर रस्ता खुद अपने दिल से गुज़रता है।
Wednesday, March 30, 2011
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31 comments:
दिलों के आइनों पे शुबह के पत्थर जो फेंको
हर एक अक्स उसके बाद टुकड़ों में उभरता है
बहुत खूब ...अच्छी गज़ल
शिखा जी,
शानदार ....बेहतरीन.....बहुत अच्छी लगी ये ग़ज़ल.....उर्दू पर आपकी पकड़ लाजवाब है......ये शेर बहुत पसंद आये -
जाओ किया माफ़ मैंने तुमको अपना क़त्ल
मगर ये रखना याद वहां जवाब देना पड़ता है
दिलों के आइनों पे शुबह के पत्थर जो फेंको
हर एक अक्स उसके बाद टुकड़ों में उभरता है
नहीं अच्छा गुरूर हरदम कभी झुकना भी जरूरी है
दरिया भी मुड़ जाता है जब कोई चट्टान अड़ता है
bahut sundar
पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ है। बहुत अच्छी गज़ल लगी।
रखती हूँ उसको अपनी दुआओं में लपेट कर
वो शख्स जो मेरे दिल की तहों में उतरता है
खूबसूरत रचना ... वाह
बहुत ही सुन्दर कहा अपने बहुत सी अच्छे लगे
आदरणीया शिखा जी
सादर सस्नेहाभिवादन !
बहुत अच्छा लिखा है आपने -
नहीं अच्छा गुरूर हरदम कभी झुकना भी जरूरी है
दरिया भी मुड़ जाता है जब कोई चट्टान अड़ता है
क्या बात है !
बड़े अजीब हैं जो कहते हैं उस तक रसाई मुहाल है
ख़ुदा के घर का हर रस्ता खुद अपने दिल से गुज़रता है।
बहुत ही शानदार ! भरपूर दाद आपके नाम !
♥नव संवत्सर की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !♥
- राजेन्द्र स्वर्णकार
आदरणीया शिखा दीपक जी
आज आपका जन्म दिन भी है …
~*~ जन्मदिवस की हार्दिक बधाई ~*~
और
~*~ मंगलकामनाएं ! ~*~
- राजेन्द्र स्वर्णकार
आदरणीया शिखा दीपक जी
आज आपका जन्म दिन भी है …
~*~ जन्मदिवस की हार्दिक बधाई ~*~
और
~*~ मंगलकामनाएं ! ~*~
- राजेन्द्र स्वर्णकार
जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।
जन्म दिन की हार्दिक शुभकामना।
अच्छी गज़ल
नहीं अच्छा गुरूर हरदम कभी झुकना भी जरूरी है
दरिया भी मुड़ जाता है जब कोई चट्टान अड़ता है
जिन्दगी को सही ढंग से जीने के लिए झुकना भी जरुरी है अभिमान रहित जीवन को सब जगह सम्मान मिलता है ...आपने बहुत प्रेरक गजल लिखी है ...आपका आभार
नहीं अच्छा गुरूर हरदम कभी झुकना भी जरूरी है
दरिया भी मुड़ जाता है जब कोई चट्टान अड़ता है
बहुत खूब ...अच्छी गज़ल
मग़र गज़ल का मकता कहाँ है मोहतरिमा ?
bahut sudar rachna!!
Jai HO mangalmay ho
सुनील भाई.....मुझे केवल अपने भावों को कागज पर उतारना आता है.....विधाओं और उनके नियम कायदों का मुझे ज्ञान नहीं......आप ही मेरी थोड़ी मदद कर दीजिये....जहाँ जो कमी हो सुधार दीजिये।
VERY GOOD GAJAL PASAND AAYI
दिलों के आइनों पे शुबह के पत्थर जो फेंको
हर एक अक्स उसके बाद टुकड़ों में उभरता है
बेहतरीन,खूबसूरत रचना ...........
वहा वहा क्या कहे आपके हर शब्द के बारे में जितनी आपकी तरी की जाये उतनी कम होगी
आप मेरे ब्लॉग पे पधारे इस के लिए बहुत बहुत धन्यवाद अपने अपना कीमती वक़्त मेरे लिए निकला इस के लिए आपको बहुत बहुत धन्वाद देना चाहुगा में आपको
बस शिकायत है तो १ की आप अभी तक मेरे ब्लॉग में सम्लित नहीं हुए और नहीं आपका मुझे सहयोग प्राप्त हुआ है जिसका मैं हक दर था
अब मैं आशा करता हु की आगे मुझे आप शिकायत का मोका नहीं देगे
आपका मित्र दिनेश पारीक
वहा वहा क्या कहे आपके हर शब्द के बारे में जितनी आपकी तरी की जाये उतनी कम होगी
आप मेरे ब्लॉग पे पधारे इस के लिए बहुत बहुत धन्यवाद अपने अपना कीमती वक़्त मेरे लिए निकला इस के लिए आपको बहुत बहुत धन्वाद देना चाहुगा में आपको
बस शिकायत है तो १ की आप अभी तक मेरे ब्लॉग में सम्लित नहीं हुए और नहीं आपका मुझे सहयोग प्राप्त हुआ है जिसका मैं हक दर था
अब मैं आशा करता हु की आगे मुझे आप शिकायत का मोका नहीं देगे
आपका मित्र दिनेश पारीक
shikha ji
bahut hi gahrahi se utar gai aapke man ki baat mere man me
जाओ किया माफ़ मैंने तुमको अपना क़त्ल
मगर ये रखना याद वहां जवाब देना पड़ता है
दिलों के आइनों पे शुबह के पत्थर जो फेंको
हर एक अक्स उसके sबाद टुकड़ों में उभरता है
sachchai ko bahut hi behatreen treeke se prastut karti ek behtreen parstuti
bahut bahut badhai
poonam
अच्छे भावों से भरी ये कविता, जो ग़ज़ल होने का एहसास भी दिलाती है.
ये शेर बहुत प्यारा बन पड़ा है.
"नहीं अच्छा गुरूर हरदम कभी झुकना भी जरूरी है
दरिया भी मुड़ जाता है जब कोई चट्टान अड़ता है"
pahali bar aayi hoon....padhkar bahut achchha laga ....badhai
बहुत सुंदर गजल है।
मुबारकां
Reading this kind of article is worthy .It was easy to understand and well presented.
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It's great stuff. I enjoyed to read this blog.
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कल 30/08/2011 को आपके दिल की बात नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!
सुन्दर शानदार गज़ल्।
'जाओ माफ किया मैंने तुमको अपना क़त्ल'
मन को छूती पंक्ति |अच्छी रचना बधाई |
आशा
जाओ किया माफ़ मैंने तुमको अपना क़त्ल
मगर ये रखना याद वहां जवाब देना पड़ता है |
वाह बहुत खूब मज़ा आ गया दोस्त जी |
बहुत ही सुन्दर |
दिलों के आइनों पे शुबह के पत्थर जो फेंको
हर एक अक्स उसके बाद टुकड़ों में उभरता है
शिखा जी बहुत अच्छी गजल बधाई
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