हाँ मैं जलती रही........मैं जली कि तुमको रौशनी मिल सके.........अँधेरे तुमसे दूर रहें.........तुम्हारी राहें रोशन हों.........जिनपर चल कर तुम तरक्की की बुलंदियों को छू सको............नहीं मैंने तुम पर कोई एहसान नहीं किया........यूँ जलना ही मेरा भाग्य था........यूँ पिघलना ही मेरी नियति थी..........ये फैसला उपरवाले ने किया था.........उस भाग्यविधाता ने किया था..........उसके फैसले में मेरा कोई दखल न था..........तुम्हारा भी न था..........मुझे कोई ऐतराज़ न था...........तुम्हें भी न था..........क्यूंकि तब तुमको मेरी ज़रुरत थी.........इस रौशनी में तुम अपने मुस्तकबिल की इबारतें लिखते रहे.........मैं ख़ामोशी से जलती रही.......मैं इसमें खुश थी..........मैं यूँ ही खुश रहती.........खामोश रहती.........फ़ना हो जाती........पर तुमको यूँ राह से भटकते देख चुप नहीं रह सकती.......मुझे अपने मिटने का गम न होता अगर तुम बन जाते.......पर आज अंधेरों की दीवारों के पार उगते.............तुम्हारे कल के सूरज की लाली का नशा तुमको हो गया........तुमको अपने ऊंचे कद पर गुमान हो गया........मैंने कहा ना मुझको कोई शिकायत न होती.........अगर तुमने ये ऊँचाइयाँ अपने ज़मीर को रौंद कर न पायी होती.........अब जब तुमको मेरी ज़रुरत नहीं..........तुम अपने गुरूर में मुझको ही मिटाने में लग गए..........तुम भूल गए कि अब तक मैंने हर पल ये ख्याल रखा..........तुमको उजाले तो मिलें पर कोई भी आँच तुम तक न आये........ ...पर इस गफ़लत में न रहना कि तुम मुझको मिटा दोगे.........मत भूलो कि मैं रौशनी दे सकती हूँ तो जला भी सकती हूँ..........आग का ही एक रूप हूँ मैं...........शमा हूँ मैं.........
Tuesday, January 4, 2011
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12 comments:
अच्छी भावाभिव्यक्ति.
C M ऑडियो क्विज़'
अच्छी पोस्ट भावानात्मक पोस्ट। गुरुर तो इंसान का वैसे भी उसे कहीं का नहीं छोड़ता। जाहिर है कि जो आग से खेलता है वो तो जल ही जाता है।
पर आपने कहा कि शमा हूं मैं...एक गीत याद आ गया काफी सुंदर है...किशोर कुमार की आवाज़ में...
शमा कहे परवाने से, परे चला जा
मेरी तरह जल जायेगा, यहाँ नहीं आ
वो नहीं सुनता उसको जल जाना होता है....
...
शमा तो कितना भी कहे परवाने ने जलना ही होता है....
औऱ गरुरु के मारे इंसान को टूटना ही होता है.....
वाह शिखा जी, बहुत ही बेहतरीन भावों से सजी हुई रचना है... बहुत खूब!
"मत भूलो कि मैं रौशनी दे सकती हूँ तो जला भी सकती हूँ..........आग का ही एक रूप हूँ मैं...........शमा हूँ मैं........."
बहुत खूब .. शानदार भावाभिव्यक्ति
आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (6/1/2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
http://charchamanch.uchcharan.com
बहुत ही सुन्दर रचना । नव वर्ष की हार्दिक बधाईयां ।
.मत भूलो कि मैं रौशनी दे सकती हूँ तो जला भी सकती हूँ..........आग का ही एक रूप हूँ मैं...........शमा हूँ मैं.........
प्यारी सोंच, प्यारी कविता,अच्छी पोस्ट
prabhawshali rachna
मुझको अपने मिटने का गम न हो ता अगर तुम बन जाते....
बहुत सुन्दर सम्रपण भाव ....
सुन्दर भाव लिए रचना |बधाई
आशा
भावानात्मक पोस्ट
अच्छी रचना
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