ह्रदय की वेदना जब
हलचल मचाये
मेरे अंतर में
कुछ कंपन
कुछ स्पंदन से
हुए मन में
आरम्भ हुआ
मस्तिष्क में
एक मंथन
कुछ शब्द आये
मनस पटल पर
और सजने लगे
क्रम से
सुंदर व्यवस्थित
मचली लेखनी
करने को अंकित
और फिर
सृजन हुआ
एक कविता का........
हलचल मचाये
मेरे अंतर में
कुछ कंपन
कुछ स्पंदन से
हुए मन में
आरम्भ हुआ
मस्तिष्क में
एक मंथन
कुछ शब्द आये
मनस पटल पर
और सजने लगे
क्रम से
सुंदर व्यवस्थित
मचली लेखनी
करने को अंकित
और फिर
सृजन हुआ
एक कविता का........




13 comments:
कविता सृजन यात्रा का बहुत सुन्दर चित्रण..
kavita rachne se pahle ke safar ko padh kar achchha laga...:)
bahut bahut subhkamnayen..
aur hum padhne chale aaye... bahut achhi lagi
सृजन यात्रा का वृत्तांत बढिया है ।
मचली लेखनी
करने को अंकित
और फिर
सृजन हुआ
एक कविता का........
xxxxxxxxxxxxxxxxxxx
लेखनी का मचलना ..और सृजन होना ..कितना खुबसूरत ..बिम्ब खिंचा है ..
आपकी लेखनी का कोई जबाब नहीं ...आपकी प्रत्येक कविता को पढ़कर मन में सकूँ और कुछ नया करने कि प्रेरणा ह्रदय में जाग्रत हुई ..निश्चित रूप से आपका लेखन प्रेरणादायक है ...आपका शुक्रिया
बेहतरीन रचना है....
शिखा जी क्या पिछली पोस्ट पढ़ी नहीं थी क्या पूरी।।।।
सुन्दर शब्द संयोजन ! कविता का सृजन... !
वाह! यही तो सृजन है .
अंतर्मन से उपजे ह्रदय की वेदना के भाव...... बहुत सुंदर
चंद घुटी हुई सांसे,
चंद चुभी हुई फांसे,
कुछ बीती हुई बातें,
कुछ जगी हुई रातें,
इस उनींदी में उदय जब रवि होता है,
सच मानिए इंसान तब कवि होता है.
बहुत सुंदर रचना है आपकी.खुदा आपको जोरे कलम और ज्यादा दे .शुभ कामनाएं.
मचली लेखनी
करने को अंकित
और फिर
सृजन हुआ
एक कविता का..
बेहतरीन रचना है...
बस ऐसे ही मंथन करती रहें,अमॄत निकलता रहेगा।
सॄजन होता चला जाएगा ।
bouth he aacha post hai aaka read kar ke aacha lagaa
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