Saturday, January 15, 2011

सृजन.......

ह्रदय की वेदना जब
हलचल मचाये
मेरे अंतर में
कुछ कंपन
कुछ स्पंदन से
हुए मन में
आरम्भ हुआ
मस्तिष्क में
एक मंथन
कुछ शब्द आये
मनस पटल पर
और सजने लगे
क्रम से
सुंदर व्यवस्थित
मचली लेखनी
करने को अंकित
और फिर
सृजन हुआ
एक कविता का........



13 comments:

Kailash C Sharma said...

कविता सृजन यात्रा का बहुत सुन्दर चित्रण..

Mukesh Kumar Sinha said...

kavita rachne se pahle ke safar ko padh kar achchha laga...:)

bahut bahut subhkamnayen..

रश्मि प्रभा... said...

aur hum padhne chale aaye... bahut achhi lagi

सुशील बाकलीवाल said...

सृजन यात्रा का वृत्तांत बढिया है ।

: केवल राम : said...

मचली लेखनी
करने को अंकित
और फिर
सृजन हुआ
एक कविता का........
xxxxxxxxxxxxxxxxxxx
लेखनी का मचलना ..और सृजन होना ..कितना खुबसूरत ..बिम्ब खिंचा है ..
आपकी लेखनी का कोई जबाब नहीं ...आपकी प्रत्येक कविता को पढ़कर मन में सकूँ और कुछ नया करने कि प्रेरणा ह्रदय में जाग्रत हुई ..निश्चित रूप से आपका लेखन प्रेरणादायक है ...आपका शुक्रिया

boletobindas said...

बेहतरीन रचना है....

शिखा जी क्या पिछली पोस्ट पढ़ी नहीं थी क्या पूरी।।।।

mukti said...

सुन्दर शब्द संयोजन ! कविता का सृजन... !

वन्दना said...

वाह! यही तो सृजन है .

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

अंतर्मन से उपजे ह्रदय की वेदना के भाव...... बहुत सुंदर

sagebob said...

चंद घुटी हुई सांसे,
चंद चुभी हुई फांसे,
कुछ बीती हुई बातें,
कुछ जगी हुई रातें,
इस उनींदी में उदय जब रवि होता है,
सच मानिए इंसान तब कवि होता है.

बहुत सुंदर रचना है आपकी.खुदा आपको जोरे कलम और ज्यादा दे .शुभ कामनाएं.

Sunil Kumar said...

मचली लेखनी
करने को अंकित
और फिर
सृजन हुआ
एक कविता का..
बेहतरीन रचना है...

amit-nivedita said...

बस ऐसे ही मंथन करती रहें,अमॄत निकलता रहेगा।
सॄजन होता चला जाएगा ।

ManPreet Kaur said...

bouth he aacha post hai aaka read kar ke aacha lagaa