सुनो......... मुझे तुमसे कुछ चाहिए...........कुछ माँगना चाहती हूँ.................देखो इनकार न करना.............तुम्हारे घर की वो जो बालकनी हैं न...............जहाँ से दूर दूर तक फैले हिमालय के पर्वत सुबह की किरण के साथ स्वर्णिम छटा बिखेरते दिखते है.............जहाँ तक नज़र जाए रंग बिरंगे फूल दिखते हैं.............जैसे वहां ईश्वरकी रंगों वाली पिटारी गिर गयी हो..........जहाँ शाम होते ही घाटी के घरों की जगमगाती रौशनी यूँ लगती है जैसे आसमान के सारे तारे जमीन पर अपना जादुई नृत्य दिख रहे हैं.........ऐसा लगता है की हिमालय की चोटियों की आकाश को छू लेनी की होड़ से घबरा कर वो घरती की गोद में सिमट आये हैं............वोही बालकनी में जहाँ हर शाम को ठंडी ठंडी हवा चलती है................जहाँ दो कुर्सियां पड़ी हैं..........जहाँ बैठ कर तुम रोज चाय का प्याला हाथ में ले कर जाने किन ख्यालों में गुम रहते हो.............प्रकृति की इस खूबसूरत छटा को निहारते हुए.............मन में घुमड़ते विचारों की बाढ़ अपनी सधी हुई लेखनी के बाँध से बाँध कर अपनी डायरी में लिखते रहते हो.............जहाँ बैठे बैठे तुम जिन्दगी की हकीकतों को तौलते हो..............अपने पराये रिश्तों को परखते हो..............इस दुनिया और दुनिया में रहने वाले बाशिंदों और उनकी दुनियादारी को समझने की कोशिश करते हो.............जहाँ तुम गुज़रे हुए लम्हों और वाकयों को याद करते हो.............जहाँ तुम लोगों के कहे शब्दों में किसी ग़ज़ल या अफ़साने का आगाज़ ढूँढ लेते हो......... जहाँ बैठ तुम ख्यालों की तिलस्मी दुनिया में खो जाते हो...........जहाँ तुमको अपने खाने पीने तो क्या खुद अपना भी होश नहीं रहता...........जहाँ से तुम इस दुनिया से परे किसी रूहानी और रूमानी संसार के हो जाते हो..........जहाँ तुम सिर्फ तुम बन के जीते हो.............जहाँ तुमने अपना एक अलग जहाँ बसा रखा है...........जिसमें सिर्फ वो लोग है जिनके दिल तुम्हारे प्यार से भरे हैं या जिनके दिल में तुम्हारे लिए प्यार भरा है...........बस तुम्हारी उसी जादुई बालकनी में........तुम्हारी उसी तिलिस्मी दुनिया के बीच..........तुम्हारे साथ एक शाम बितानी है.........बोलो तो..........मुझे मिलेगी न.........तुम्हारी एक शाम...........
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2 comments:
बहुत ही सुन्दर...
तुम्हारी उसी तिलिस्मी दुनिया के बीच..........तुम्हारे साथ एक शाम बितानी है...
aapki ye soch puri ho:)
bahut pyari post.........dil ko chhua..!
par aap isko tareeke se sayad saja nahi payeee.......
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